Portrait of Dr. Vimal Singh

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Dr. Vimal Singh

Assistant Professor

Department Of Advanced Educational Research And Teaching Of Educational Foundations
School of Teacher Education
Chhatrapati Shahu Ji Maharaj University, Kanpur

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  • Deputy Director (Technical)— Dronacharya Centre of Online and Distance Education, CDOE
  • Associate Chief Proctor
  • Member Core, Steering and Working Committee IQAC
  • Incharge – Departmental Website & Incharge– Department Alumni Association
  • Member Institute Innovation Council (IIC-6.0)
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  1. 19OCT2026
    Newspaper Coverage

    शिक्षकों की राय से बदलेगी उच्च शिक्षा की तस्वीर: सीबीसीएस पर देश का नया शोध उपकरण तैयार

    कानपुर। उच्च शिक्षा में बदलाव की चर्चा तो खूब होती है, लेकिन जिस व्यवस्था को कक्षा में लागू करने की जिम्मेदारी शिक्षकों पर है, उसके बारे में शिक्षक वास्तव में क्या सोचते हैं? वे कितने तैयार हैं, उन्हें कितनी सुविधाएं मिल रही हैं और किन मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है? अब इन सवालों के जवाब अंदाजे से नहीं, बल्कि वैज्ञानिक तरीके से जुटाए जा सकेंगे। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू), कानपुर से जुड़े डॉ. विमल सिंह और सूरज गुप्ता ने Choice-Based Credit System (CBCS) को लेकर शिक्षकों की धारणा और अभिवृत्ति मापने के लिए एक मानकीकृत उपकरण विकसित किया है। इसका नाम Teachers’ Perception and Attitude toward the Choice-Based Credit System Scale (TPA-CBCSS) है। यह उपकरण वर्ष 2026 में Prasad Psycho Private Limited द्वारा प्रकाशित किया गया है। इस शोध की खास बात इसका व्यापक आधार है। स्केल के मानकीकरण के लिए कानपुर के सीएसजेएमयू और उससे संबद्ध महाविद्यालयों के 676 शिक्षकों से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग किया गया। इसमें शहरी और ग्रामीण संस्थानों के साथ कला, विज्ञान और वाणिज्य विषयों से जुड़े शिक्षकों को शामिल किया गया। इससे सीबीसीएस के प्रति शिक्षकों की सोच को अलग-अलग पहलुओं से समझने का आधार तैयार हुआ। यह स्केल शिक्षकों की राय को पांच प्रमुख आयामों में समझता है- जागरूकता: सीबीसीएस के नियमों, क्रेडिट व्यवस्था और उद्देश्यों की शिक्षकों को कितनी जानकारी है। लचीलापन: विषयों के चयन और बहुविषयक पढ़ाई की व्यवस्था शिक्षकों को कितनी उपयोगी लगती है। गुणवत्ता प्रबंधन: प्रशिक्षण, संस्थागत सहयोग और शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर शिक्षकों का अनुभव कैसा है। मूल्यांकन एवं परीक्षा: ग्रेडिंग, सतत मूल्यांकन और परीक्षा व्यवस्था को लेकर उनकी क्या राय है। चुनौतियां: अतिरिक्त कार्यभार, संसाधनों की कमी, प्रशिक्षण और प्रशासनिक समन्वय जैसी समस्याएं कितनी गंभीर हैं। इस उपकरण के अंतिम रूप में 32 कथन हैं। शिक्षक पांच विकल्पों वाले उत्तर-पैमाने पर अपनी सहमति या असहमति दर्ज करते हैं। इसे पूरा करने में सामान्यतः 10 से 15 मिनट लगते हैं और इसका हिंदी तथा अंग्रेजी, दोनों भाषाओं में उपयोग किया जा सकता है। स्केल की विश्वसनीयता के लिए Cronbach's Alpha 0.93 दर्ज किया गया है, जिसे मापन उपकरण की आंतरिक संगति के लिहाज से उत्कृष्ट माना जाता है। इसके विकास में विशेषज्ञों की समीक्षा, पायलट परीक्षण, आइटम विश्लेषण और फैक्टर विश्लेषण जैसी प्रक्रियाएं अपनाई गईं। इस उपकरण का इस्तेमाल केवल शोध तक सीमित नहीं है। विश्वविद्यालय प्रशासन इससे यह समझ सकता है कि शिक्षकों को किस क्षेत्र में अधिक प्रशिक्षण की जरूरत है, सीबीसीएस लागू करने में कौन-सी व्यावहारिक बाधाएं सामने आ रही हैं और किन विभागों में अतिरिक्त सहयोग की आवश्यकता है। फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रमों की जरूरत पहचानने, नीतियों के प्रभाव का अध्ययन करने और अलग-अलग संस्थानों में शिक्षकों की धारणाओं की तुलना करने में भी यह उपयोगी हो सकता है।

  2. 27SEP2026
    Newspaper Coverage

    सीएसजेएमयू की अंतरराष्ट्रीय अकादमिक पहचान को नई उड़ान: डॉ. विमल सिंह बने टेलर एंड फ्रांसिस के सहायक संपादक

    कानपुर। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय की अकादमिक उपलब्धियों में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है। विश्वविद्यालय के शिक्षक डॉ. विमल सिंह को अंतरराष्ट्रीय प्रकाशक टेलर एंड फ्रांसिस की प्रतिष्ठित शोध पत्रिका कोजेंट एजुकेशन में शिक्षा में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी विषयक विभाग का सहायक संपादक नियुक्त किया गया है। शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से बढ़ती कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल शिक्षा और तकनीकी माध्यमों के दौर में डॉ. विमल सिंह को मिली यह जिम्मेदारी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कोजेंट एजुकेशन शिक्षा के विभिन्न क्षेत्रों में शोध प्रकाशित करने वाली बहुविषयक, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाने वाली और खुले रूप में उपलब्ध शोध पत्रिका है। इसमें शिक्षा में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी से संबंधित शोध के लिए अलग विभाग भी है। स्कोपस में सूचीबद्ध, 4.4 अंक और प्रथम श्रेणी: कोजेंट एजुकेशन शोध पत्रिका स्कोपस में सूचीबद्ध है। टेलर एंड फ्रांसिस की आधिकारिक जानकारी के अनुसार वर्ष 2025 में पत्रिका का उद्धरण सूचकांक 4.4 है और इसकी सर्वोच्च श्रेणी क्यू-1 है। पत्रिका वेब ऑफ साइंस ईएससीआई, एरिक और डीओएजे सहित कई प्रमुख शोध सूचकांक संस्थाओं में भी सूचीबद्ध है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और तकनीक के दौर में बड़ी जिम्मेदारी: डॉ. विमल सिंह को शिक्षा में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी विभाग की संपादकीय जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस विभाग में शिक्षा एवं प्रशिक्षण में तकनीकी साधनों के समावेश, शिक्षण-अधिगम में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के उपयोग तथा इससे संबंधित शोध और व्यावहारिक कार्यों को स्थान दिया जाता है। विश्वविद्यालय की आधिकारिक जानकारी के अनुसार डॉ. विमल सिंह शिक्षक शिक्षा विद्यालय में सहायक आचार्य हैं। उनका शोध कार्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता, यंत्र अधिगम, शिक्षक शिक्षा, डिजिटल शिक्षण पद्धति और उभरती तकनीकों जैसे क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है। विश्वविद्यालय के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि यहां के एक शिक्षक को अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित शिक्षा शोध पत्रिका में संपादकीय जिम्मेदारी निभाने का अवसर मिला है। इससे विश्वविद्यालय की शोध एवं तकनीक आधारित अकादमिक पहचान को वैश्विक स्तर पर और मजबूती मिलने की उम्मीद है। डॉ. विमल सिंह ने इस उपलब्धि के लिए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह जिम्मेदारी शिक्षा में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उभरती तकनीकों से जुड़े गुणवत्तापूर्ण शोध को वैश्विक अकादमिक विमर्श से जोड़ने का अवसर प्रदान करेगी।

  3. 28AUG2026
    Newspaper Coverage

    एआई से पढ़ाई के साथ शिक्षक भी जरूरी

    सीएसजेएमयू ने कई छात्रों पर कराया अध्ययन, पढ़ाई का फॉर्मूला किया गया तैयार। शिक्षा विभाग के डॉ. विमल सिंह, अशोक कुमार यादव, अभिषेक कुमार मिश्रा व सूरज गुप्ता ने 2020-2025 तक कई अंतरराष्ट्रीय जर्नल का अध्ययन किया है। इससे निकले निष्कर्ष में पाया गया कि भविष्य की शिक्षा का रास्ता न पुरानी परंपराओं से होकर जाता है और न ही केवल आधुनिक तकनीक से। असली रास्ता दोनों के बेहतर तालमेल में है। जनरेटिव एआई विद्यार्थियों को उनकी जरूरत के अनुसार पढ़ने में मदद कर सकता है, परंतु तकनीक की अपनी सीमाएं हैं। मानवीय संवेदना, नैतिक मार्गदर्शन, वास्तविक शिक्षक-विद्यार्थी संबंध और जीवन मूल्यों का विकास केवल तकनीक के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता।

  4. 28AUG2026
    Television Coverage

    शिक्षक के साथ एआई से पढ़ाई का सफर होगा पूरा - The Journey Of Learning With Ai Alongside The Teacher Will Be Complete

    छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU), कानपुर के शिक्षा विभाग के डॉ. विमल सिंह एवं साथी शोधकर्ताओं द्वारा किया गया अध्ययन: शिक्षक के मार्गदर्शन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Generative AI) के तालमेल से विद्यार्थियों के ज्ञानार्जन एवं व्यक्तित्व विकास का सफर सफलतापूर्वक पूरा होगा।

  5. 06AUG2026
    Newspaper Coverage

    जेन जी का मिजाज बताएगा डिजिटल इन्फ्लुएंस स्केल: सीएसजेएमयू के शिक्षा विभाग ने जेन जी पर शोधों का अध्ययन किया

    छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU), कानपुर के शिक्षा विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विमल सिंह और शोधकर्ताओं द्वारा जेन जी (Gen Z) के विचारों, व्यवहार, निर्णय क्षमता और सामाजिक दृष्टिकोण पर डिजिटल मीडिया के प्रभाव को मापने के लिए एक 'डिजिटल इन्फ्लुएंस स्केल' तैयार किया गया है। यह 38 प्रश्नों का एक वैज्ञानिक साइकोमेट्रिक उपकरण है जो युवाओं पर डिजिटल मीडिया के निर्भरता, इको चैंबर प्रवृत्ति, ऑनलाइन साथियों के प्रभाव और मानसिक लचीलेपन जैसे 10 प्रमुख आयामों का आकलन करेगा।

  6. 03AUG2026
    Newspaper Coverage

    रिसर्च, टीचिंग, इनोवेशन से जुड़ी उपलब्धियां एक ही प्लेटफॉर्म पर: सीएसजेएमयू ने एआई की मदद से बनाया पोर्टफोलियो, वीसी ने किया लांच

    छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU), कानपुर के डी-कोड (D-CODE) डिपार्टमेंट के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. विमल सिंह ने अपना पर्सनल पोर्टफोलियो (www.drvimalsingh.in) विकसित किया है, जिसे एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की मदद से तैयार किया गया है। इसे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक द्वारा लांच किया गया। इस वेबसाइट पर डॉ. सिंह के रिसर्च पेपर, पेटेंट, कॉपीराइट, ई-कंटेंट, वीडियो और शैक्षणिक उपलब्धियां एक ही स्थान पर उपलब्ध हैं। कुलपति ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बताया।

About & Academic Background

A dedicated educator and researcher with 12+ years of experience in higher education, focusing on Educational Technology, Artificial Intelligence in Education, and Curriculum Development.

23 April 2022 to the present

Assistant Professor

Department Of Advanced Educational Research And Teaching Of Educational Foundations, School of Teacher Education, C.S.J.M. University, Kanpur, UP

18 January 2021 to 22 April 2022

Assistant Professor

Balram Krishan Academy, (A College of Higher Education), University of Lucknow, Lucknow

2019 - 2020

Verified Educator

Unacademy

18 January 2016 to 17 January 2021

Junior & Senior Research Fellow (JRF/SRF)

Department of Education, University of Lucknow

1 July 2014 to 17 Jan 2016

Assistant Professor

Balram Krishan Academy (A College of Higher Education), University of Lucknow, Lucknow

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Journal of Research in Education (A Peer Reviewed and Refereed Bi-annual Journal)  |  St. Xavier’s College of Education (Autonomous), Patna, Vol. 14 No. 01, June 2026, ISSN (P): 2347-5676, ISSN (O): 2582-2357, Impact Factor: 6.295, Page No: 105-117.

Dr. Vimal Singh (Co-Author)